माण्डूक्य उपनिषद

'ॐ' - यह अक्षर ही सर्व है । सब उसकी ही व्याख्या है । भूत, भविष्य, वर्तमान सब ओंकार ही हैं । तथा अन्य जो त्रिकालतीत है, वह भी ओंकार ही है ॥१॥ यह सब कुछ ब्रह्म ही है । यह आत्मा भी ब्रह्म ही है । ऐसा यह आत्मा चार पादों वाला है ॥२॥… Continue reading माण्डूक्य उपनिषद

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