केन उपनिषद (संस्कृत)

प्रथम खण्ड ॐ केन इषितम् पतति प्रेषितम् मनः केन प्राणः प्रथमः प्रैति युक्तः । केन इषिताम् वाचम् इमाम् वदन्ति चक्षुः श्रोत्रं क उ देवो युनक्ति ॥१॥ श्रोत्रस्य श्रोत्रं मनसो मनो यत् वाचः ह वाचम् स उ प्राणस्य प्राणः । चक्षुषः चक्षुः अतिमुच्य धीराः प्रेत्य अस्मात् लोकात् अमृताः भवन्ति ॥२॥ न तत्र चक्षुः गच्छति न वाक्… Continue reading केन उपनिषद (संस्कृत)

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कठ उपनिषद

प्रथम अध्याय प्रथम वल्ली ॐ प्रसिद्ध है कि फल के इच्छुक वाजश्रवा के पुत्र (उद्दालक) ने यज्ञ में अपना सारा धन दे दिया । उसका एक नचिकेता नाम का पुत्र था ॥१॥ जिस समय दक्षिणा के रूप में देने के लिए गौएँ ले जायी जा रही थीं, छोटा बालक होने पर भी उसमें श्रद्धा का… Continue reading कठ उपनिषद