केन उपनिषद् (संस्कृत)

केन इषितम् पतति प्रेषितम् मनः केन प्राणः प्रथमः प्रैति युक्तः । केन इषिताम् वाचम् इमाम् वदन्ति चक्षुः श्रोत्रं क उ देवो युनक्ति ॥१॥ . . . .

ईशावास्य उपनिषद् (संस्कृत)

ईशा वास्यम् इदं सर्वम यत्किञ्च जगत्यां जगत । तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्य स्विद् धनम् ।।१।। . . . .

कठ उपनिषद्

प्रसिद्ध है कि फल के इच्छुक वाजश्रवा के पुत्र (उद्दालक) ने यज्ञ में अपना सारा धन दे दिया । उसका एक नचिकेता नाम का पुत्र था ॥१॥ जिस समय दक्षिणा के रूप में देने के लिए गौएँ ले जायी जा रही थीं, छोटा बालक होने पर भी उसमें श्रद्धा का आवेश हुआ । वह विचार करने लगा ॥२॥ . . . .

माण्डूक्य उपनिषद्

ओम् - यह अक्षर ही सर्व है । सब उसकी ही व्याख्या है । भूत, भविष्य, वर्तमान सब ओंकार ही हैं । तथा अन्य जो त्रिकालतीत है, वह भी ओंकार ही है ॥१॥ . . . .

मुण्डक उपनिषद्

सम्पूर्ण देवताओं में सबसे पहले ब्रह्मा उत्पन्न हुआ । वह विश्व का रचयिता और समस्त लोकों की रक्षा करने वाला था । उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र अथर्वा को समस्त विद्याओं की आधारभूत ब्रह्मविद्या का उपदेश दिया ॥१॥ . . . .

प्रश्न उपनिषद्

भरद्वाज पुत्र सुकेशा, शिबिकुमार सत्यकाम, गर्ग गोत्र में उत्पन्न सौर्यायणी, कौसलदेशीय आश्वलायन, विदर्भदेशीय भार्गव और कत्य का प्रपौत्र कबन्धी - ये ब्रह्मपरायण और ब्रह्मनिष्ठ सभी ब्रह्म की खोज करते हुए भगवन पिप्पलाद ऋषि के पास यह सोचकर कि ये हमें उस विषय में सब बताएँगे, हाथ में समित्पाणि लेकर गए ॥१॥ . . . .