श्वेताश्वतर उपनिषद्

ब्रह्मवादी कहते हैं - जगत का कारण ब्रह्म कौन है ? हम किससे उत्पन्न हुए हैं । किसके द्वारा जीवित हैं ? कहाँ स्थित हैं ? हे ब्रह्मविद ! किसके अधीन रहकर सुख-दुःख में व्यवस्था का अनुवर्तन करते हैं ?॥१॥

धम्मपद

सारे कार्यों का प्रारम्भ मन से होता है । मन श्रेष्ठ है । सारे कार्य मनोमय हैं । मनुष्य यदि दुष्ट मन से बोलता या कार्य करता है तो दुःख उसका पीछा करता है, जिस प्रकार पहिया बैल के पैर का पीछा करता है ।1।