साँख्यकारिका

तीन प्रकार के दुःखों के आघात से ही उनके निवारण के हेतु जिज्ञासा उत्पन्न होती है । लौकिक उपाय होने के कारण वह जिज्ञासा व्यर्थ है, ऐसा नहीं है, क्योंकि उनमें दुःख की आत्यन्तिक निवृत्ति नहीं है ।1। लौकिक उपाय की तरह वेदोक्त उपाय भी अविशुद्ध, क्षरणशील और अतिशययुक्त हैं । इसके विपरीत व्यक्त-अव्यक्त और… Continue reading साँख्यकारिका

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