मुण्डक उपनिषद्

सम्पूर्ण देवताओं में सबसे पहले ब्रह्मा उत्पन्न हुआ । वह विश्व का रचयिता और समस्त लोकों की रक्षा करने वाला था । उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र अथर्वा को समस्त विद्याओं की आधारभूत ब्रह्मविद्या का उपदेश दिया ॥१॥ . . . .

प्रश्न उपनिषद्

भरद्वाज पुत्र सुकेशा, शिबिकुमार सत्यकाम, गर्ग गोत्र में उत्पन्न सौर्यायणी, कौसलदेशीय आश्वलायन, विदर्भदेशीय भार्गव और कत्य का प्रपौत्र कबन्धी - ये ब्रह्मपरायण और ब्रह्मनिष्ठ सभी ब्रह्म की खोज करते हुए भगवन पिप्पलाद ऋषि के पास यह सोचकर कि ये हमें उस विषय में सब बताएँगे, हाथ में समित्पाणि लेकर गए ॥१॥ . . . .

तैत्तिरीय उपनिषद्

मित्र हमारे लिए कल्याणप्रद हो, वरुण हमारे लिए कल्याणप्रद हो । अर्यमा हमारे लिए कल्याणप्रद हो । इन्द्र और बृहस्पति हमारे लिए कल्याणप्रद हों । विस्तृत पादविक्षेप वाले विष्णु हमारे लिए कल्याणप्रद हों । ब्रह्म को नमस्कार ! वायु तुम्हें नमस्कार ! तुम ही प्रत्यक्ष ब्रह्म हो । अतः तुम्हें ही प्रत्यक्ष ब्रह्म कहूँगा । तुम्हें ही ऋत कहूँगा । और तुम्हें ही सत्य कहूँगा । वह मेरी रक्षा करे । वह उपदेशक की भी रक्षा करे । मेरी रक्षा करो । उपदेशक की भी रक्षा करो । ॐ शान्ति शान्ति शान्ति ॥१॥ . . . .

केन उपनिषद्

किसकी इच्छा से प्रेरित होकर मन गिरता है । किसके द्वारा नियुक्त होकर वह श्रेष्ठ प्रथम प्राण चलता है । किसकी इच्छा से इस वाणी द्वारा बोलता है । कौन देव चक्षु और श्रोत्र को नियुक्त करता है ॥१॥ . . . .

ईशावास्य उपनिषद्

इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जो कुछ ये जगत हैं, सब ईशा (ईश्वर) द्वारा ही व्याप्त है । उसके द्वारा त्यागरूप जो भी तुम्हारे लिए प्रदान किया गया है उसे अनासक्त रूप से भोगो । किसी के भी धन की इच्छा मत करो ॥१॥ . . .