धम्मपद

यमकवर्ग सारे कार्यों का प्रारम्भ मन से होता है । मन श्रेष्ठ है । सारे कार्य मनोमय हैं । मनुष्य यदि दुष्ट मन से बोलता या कार्य करता है, तो दुःख उसका पीछा करता है, जिस प्रकार पहिया बैल के पैर का पीछा करता है ।1। सारे कार्यों का प्रारम्भ मन से होता है ।… Continue reading धम्मपद

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